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शुक्रवार, 25 मार्च 2016

परवा: कौन करे !

तकरीर  की  परवा:  कौन  करे
बेपीर  की  परवा:  कौन  करे

दिलवाले  दिल  पर  मरते  हैं
तस्वीर  की  परवा:  कौन  करे

जो  तीर  निगाहों  से  निकले
उस  तीर  की  परवा:  कौन  करे

ख़त  के  मौजूं   से  मतलब  है
तहरीर  की  परवा:  कौन  करे

वो:  ज़ह्र  पिलाएं  या  आंसू
तासीर  की  परवा:  कौन  करे

हम  ख़्वाबतराशी  करते  हैं
ता'बीर  की  परवा:  कौन  करे

है  ज़ार  निशाने  पर  अपने
ता'ज़ीर  की  परवा:  कौन  करे

हालात  बग़ावत  के  हों  जब
ज़ंजीर  की  परवा:  कौन  करे

बारूद  रग़ों  में  है  जब  तक
शमशीर  की  परवा:  कौन  करे  !

                                                              (2016)

                                                       -सुरेश  स्वप्निल

शब्दार्थ: तकरीर : भाषण; परवा: चिंता; बेपीर: निर्दयी; ख़त : पत्र; मौजूं : विषय; तहरीर : हस्तलिपि; ज़ह्र : विष; तासीर: प्रभाव; ख़्वाबतराशी : स्वप्न को सुंदर बनाना; ता'बीर : स्वप्न का फल; ज़ार : अत्याचारी शासक; ता'ज़ीर : दंड; हालात : परिस्थितियां; बग़ावत : विद्रोह; रग़ों: शिराओं; शमशीर: तलवार, कृपाण।

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