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गुरुवार, 16 जून 2016

समंदरों की सियासत ...

हमारे  दिल  की  हरारत  किसी  को  क्या  मालूम
ये:  मर्ज़  है  कि  मुहब्बत  किसी  को  क्या  मालूम

बड़े   सुकूं   से    वो:      शाने       मिलाए   बैठे   थे
कहां  हुई  है    शरारत    किसी  को    क्या  मालूम

सुबह   से     शाम   तलक     आज़माए    जाते   हैं
ये:  इम्तिहां  है  कि  चाहत  किसी  को  क्या  मालूम

किया   करो   हो     बहुत  तंज़     शक्लो-सूरत  पर
हमारे    तर्बो-तबीयत    किसी   को     क्या  मालूम

निज़ाम   को     है   फ़िक्र     बस     रसूख़दारों   की
कहां   करेंगे    इनायत    किसी   को   क्या  मालूम

हरेक   दरिय :   को    प्यारी   है    अपनी   आज़ादी
समंदरों  की    सियासत    किसी  को  क्या  मालूम

अभी-अभी    तो   कहन   में     निखार     आया  है
अभी   हमारी  मुहब्बत   किसी  को    क्या  मालूम

पढ़ी     नमाज़      न      सज्दागुज़ार     हैं     उनके
हमारा     रंगे-इबादत   किसी   को     क्या  मालूम !

                                                                                            (2016)

                                                                                    -सुरेश  स्वप्निल 

शब्दार्थ : हरारत : ताप ; मर्ज़ : रोग ; सुकूं : आश्वस्ति ; शाने : कंधे ; तलक : तक ; इम्तिहां : परीक्षा ; चाहत : इच्छा ; करो हो : करते हो ; तंज़ : व्यंग्य ; शक्लो-सूरत : मुखाकृति ; तर्बो-तबीयत : संस्कार और स्वभाव ; निज़ाम : प्रशासन, सरकार ; रसूख़दारों : प्रभावशाली व्यक्तियों ; इनायत : कृपा ; दरिय: : नदी ; कहन :शैली;
सज्दागुज़ार :दंडवत प्रणाम करने वाले; रंगे-इबादत : पूजा का ढंग ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 17/06/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (18-06-2016) को "वाह री ज़िन्दगी" (चर्चा अंक-2377) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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